0

प्रेम तेरा पहचाना ही नहीं

Posted by babul on 6/10/2012 12:36:00 PM
ऐ मेरे दिल तू अफसोस न जता,
आंखों की नमी तू भी ठहर जा।

उसने प्रेम तेरा पहचाना ही नहीं,
ऐ आंसू न उसके दरीचे पर जा।
  • - रविकुमार बाबुल

|

0 Comments

Post a Comment

Copyright © 2009 babulgwalior All rights reserved. Theme by Laptop Geek. | Bloggerized by FalconHive.