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तुम्हारी यादें बूंद बनके मन को भिगों दे

Posted by babul on 4/30/2012 12:19:00 AM


हर मौसम का एक महत्व है। मौसम बाहर ही नहीं हर किसी के जीवन में आता भी है और छा भी जाता है। मौसम ही इन्द्रधनुष रचता है, यही इन्द्रधनुष ख्वाबों को सींचता भी है। लेकिन शाश्वत सच यह है कि किसी के सभी ख्वाब पूरे कहां होते हैं? मेरे जीवन का ख्वाब भी उसको करीब पाना चाहता था। लेकिन जीवन के मौसम में बसंत के बाद पतझड़ नहीं आएगा। यह सोचने की जुर्रत या साहस मैं जुटा ही नहीं पाया था। या यूं कहें कि इसकी उम्मीद ही नहीं थी? लेकिन उसने मेरे हिस्से में बसंत भी लिखा और पतझड़ भी। टुकड़े-टुकड़े होकर बहुत कुछ बिखर  जाता है , ख्वाब ही नहीं उम्मीद भी?  ऐसे में खुद  के बजूद को बिखरते हुए देखने का दुस्साहस जुटाने में भला  कोई खुद  को कैसे इंकार कर सकता है? बड़ी टूटन होती है, जिस्म ही नहीं दिल भी जब यह मान  बैठे कि सावन की उम्मीद बीजों को करना चाहिेए, बजूका को नहीं? तब ऐसे में बहुत कुछ प्रस्फुटित भी होता है, और कुम्हलाता भी है। उसकी नजर में, मैं बजूका था। और खुद की नजर में  मैं खुद को सदैव बीज ही मानता रहा। समझ नहीं आता, उससे मुुझे किसी तरह की उम्मीद रखनी भी चाहिए थी कि नहीं? 
खैर बसंत के बाद पतझड़ का आना, सावन आने की उम्मीद तो  जगाए ही रखता है। सो.... कोशिश करूंगा कि ख्वाब और उम्मीद के जिस शाख पर मैं था, और मैंने उससे जुड़ कर जिस सावन की एक उम्मीद जगा ली थी, लेकिन मुुझे पता ही नहीं था कि वह तो बसंत थी। जाते-जाते मुुझे सिर्फ पतझड़ ही सौंप कर जा सकती थी? तब वह गलत कहां थी ? सो... कोशिश करूंगा वक्त के उस शाख से भले ही उसके मिलने की नाउम्मीदी में टूटकर, गिर कर बिखर जाऊं ? लेकिन यादों की कोई हवा मुुझे उन शाखों से कभी दूर न ले जाए, जहां उसकी यादें रची- बसी हैं। सोचता  हूं जब कभी किसी सावन की दस्तक हो और तुम्हारी यादें बूंद बन कर मेरे मन को भिगों दे, तब एक दुआ धरती के भींगने की ही नहीं , बल्कि बीजों के प्रस्फुटन के लिए भी करनी होगी? ताकि मेरे प्रति तुम्हारे दिल के बंजर होने का अहसास भुलाया जा सके और इन्हीं अहसासों के आसरे अपने प्रेम को तुम्हारे पास न सिर्फ बोया जाए, बल्कि उसे पोषित और पल्लवित भी किया जा सके? ताकि तुम्हारे बसंत होने के बावजूद सावन की उम्मीद कायम रखी जा सके?

  •  रविकुमार बाबुल



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2 Comments


बहुत ही गहरे भावो की अभिवयक्ति......


आदरणीय सुषमा जी , यथायोग्य अभिवादन। शुक्रिया....मन के गहरे भावों को समझ पाने के लिए.... ।

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