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तेरी याद

Posted by babul on 2/14/2012 12:15:00 PM

सूरज की पहली किरणें,
दे जाती हैं रोज तेरी याद।
चांद की शीतलता,
सहलाती है तेरी याद।

क्यूं रात को अक्सर आकर,
आंखें मेरी धो जाती हैं तेरी याद।
रोज सोचता हूं भूल जाऊं तुझे,
न भूलने की कसम दे जाती है तेरी याद।

  • रविकुमार बाबुल


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4 Comments


बहुत सुन्दर..भावों और शब्दों का उत्कृष्ट संयोजन


आदरणीय अमरेन्द्र जी , यथायोग्य अभिवादन। जी शुक्रिया... मेरी यादों में शरीक होने के लिए....।


आदरणीय संजय जी , यथायोग्य अभिवादन। जी... शुक्रिया ...मेरे भावों से गढ़े शब्दों को दिल से महसूसने के लिए....।

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