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मन्नत

Posted by babul on 1/09/2012 06:10:00 PM

अक्सर वो मन्नतें,
हो जाती हैं पूरी,
जो टूटते हुये,
तारों को देख कर मांगी जाये।

आज मैंने भी,
मांगी है मन्नत,
अपने टूटे हुये दिल से,
तेरा साथ मिल जाये,
सदा-सदा के लिये।

सोचता हूं,
तारों का टूटना सच है,
और दिल का टूटना भी।

फिर कोई तो बतलाए,
दिल से कितने बड़े होते हैं तारे?
जो अनसुनी रह गई दिल की आवाज,
और पूरी नहीं हुयी मेरी मन्नत?


  • रवि कुमार बाबुल

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4 Comments


bahut khoob sir...mann ke bahvo ko bakhubi prastut kiya hai


आदरणीय सोमाली जी , यथायोग्य अभिवादन। मन के भावों को सहज तरीके से समझने के लिए शुक्रिया....। आपका आना अच्छा लगा....।


आदरणीय विद्या जी , यथायोग्य अभिवादन। जी... शुक्रिया ... आपका आना अच्छा लगा....।

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