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नसीब

Posted by babul on 12/28/2011 12:55:00 PM


हर किसी की आंखों में,
उनका नसीब पढ़ लेता हूं,
कि वह किसी से मिल रहे हैं,
या फिर बिछड़ रहे हैं आज?

रोज देखता हूं,
स्टेशन पर नमी,
जो किसी को लेने आते हैं,
या फिर किसी को छोड़ने आयें हैं,
उनकी आंखों में?

इंतजार मुझे भी है,
खुद के नसीब लिखने का?
जब तुम मुझे लेने आओ,
और हम दोनों,
निचोड़ लें अपनी-अपनी आंखों की नमी,
डूबो दें स्टेशन,
रोक दें रेलगाड़ी,
सदा-सदा के लिये।


  • रवि कुमार बाबुल




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6 Comments


आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-743:चर्चाकार-दिलबाग विर्क


....kaun kise mile..yah sab naseeb ka khel hai..
badiya prastuti..


बेहतरीन........आपको नववर्ष की शुभकामनायें


आदरणीय दिलबाग जी, यथायोग्य अभिवादन। चर्चामंच के मंच पर जगह देने के लिए शुक्रिया.....।


आदरणीय कविता जी , यथायोग्य अभिवादन। जी... सच कहा आपने .... नसीब में ही था मेरे कि कोई मुझसे बिछड़े भी... शुक्रिया।


आदरणीय सुषमा जी , यथायोग्य अभिवादन। जी .... शुक्रिया।

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