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याद

Posted by babul on 12/25/2011 03:45:00 PM


मेरी आंखों में,
तुम्हारी याद,
खारे पानी में,
हो जाती है तब्दील।

सोचता हूं मैं ,
तुमको भी,
तन्हाई में,
आती होगी याद मेरी?

यादों को सम्हाल रखा है मैंनें,
क्यूंकि,
मुझे तुमसे प्यार है।

तुमने कहां गलत किया मुझको भूलाकर,
क्यूंकि,
मेरा प्यार तुम्हें स्वीकार ही कहां था?



  • रविकुमार बाबुल



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2 Comments


दिल को छू हर एक पंक्ति....


आदरणीय सुषमा जी, यथायोग्य अभिवादन। हर इक पंक्ति ने आपके दिल को छुआ.... जान कर अच्छा लगा.... आपका आना भी...।

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