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गुलाब

Posted by babul on 9/05/2011 08:38:00 AM



  • सुर्ख गुलाब की टहनी से,
    लिपटी बूंद,
    पूछ रही थी कांटों से,
    तुम क्यूं उग जाते हो?
    तभी मेरे दिल में चुभी थी याद तेरी,
    आंखों से बह निकली थी बूंद,
    आंसुओं ने फिर कहा था,
    उस तरह,
    इक गुलाब की याद में,
    चुभता है जो दिल में,
    जरुरी होता है,
    किसी को गुलाब बनाने के लिये,
    खुद कांटा हो जाना?



    • रविकुमार बाबुल




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