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शिकायत

Posted by babul on 8/31/2011 01:42:00 AM

आज तुम्हारी यादें,
सिरहाने बैठकर,
रोई थी मेरे।
भींगे तकिये ने,
की है शिकायत,
मुझसे।



  • रविकुमार बाबुल



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4 Comments


क्या बात है... क्या बात है...
सादर बधाई...


आदरणीय संजय मिश्रा जी,
मेरी रचना को आपने पढ़ा, जानकर अच्छा लगा। आने के लिये शुक्रिया।
रविकुमार बाबुल


आदरणीय सुषमा जी,
मेरी रचना को सराहने के लिये शुक्रिया।
रविकुमार बाबुल
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