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ईश्वर की गलती

Posted by babul on 6/23/2011 04:04:00 PM




  • रविकुमार बाबुल 


अचानक मेरी उंगलियों ने उसकी हथेली को अपने पहरे में ले लिया था, वह स्थिर रह, शांत भाव से देखती रही। मैं उसकी हथेली पर कुछ खोजने लगा था, लगा जैसे वह कह रही हो तुम भी यह हाथ छोड़ तो नहीं दोगें? पर मेरा जवाब सुने बगैर उसने पूछ लिया था, हाथ पढऩा आता है? मतलब की चीजें पढ़ लेता हूं, मैंने भी कह दिया था।
मैंने उसकी हथेली की तमाम रेखाओं को दौड़ते-भागते, हांफते खंगाल डाला था? पर मुझे उसकी हथेली की कोई भी रेखा मेरे नाम को ढ़ोते हुये नहीं मिली। उसकी हथेली से सटाकर मैंने अपनी हथेली को गौर से देखा तो मेरी हथेली की सारी रेखाओं में बस एक उसका ही नाम लिखा था? सोचता हूं, इजाजत दे दो तुम तो ईश्वर के इस प्रूफ मिस्टेक को इरेज कर दूं, तुम्हारी हथेली पर अपने नाम की मेंहदी रच दूं और इस तरह अपनी हथेली का जेरॉक्स कर, तुम्हारी हथेली पर चिपका कर ईश्वर की गलती सुधार लूं?



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10 Comments


बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति.......


aapke man ke bhaw hmesha hi man ko chhu jate h.


आदरणीय डॉ. (सुश्री) शरद सिंह जी,
यथायोग्य अभिवादन् ।

मेरी भावाभिव्यक्ति को पढ़कर उसे और अधिक सुन्दर बनाने के लिये शुक्रिया। आपका आना वाकई अच्छा लगा। आने के लिये शुक्रिया।

रविकुमार बाबुल
ग्वालियर


आदरणीय सुषमा आहुति जी,
यथायोग्य अभिवादन् ।

सुषमा जी, ईश्वर की गलती सार्थक कैसे बन गयी, कभी बतलाइयेगा? ऐसा महसूसने के लिये तहे दिल से शुक्रिया।

रविकुमार बाबुल
ग्वालियर


आदरणीय ममता दीदी जी,
यथायोग्य अभिवादन् ।

मेरे मन के भाव किसी मन को छूने की हैसियत रखते हैं? यह जानकर अच्छा लगा। लेकिन तमाम मन का अपनापन, और एक मन का खालीपन, आज तलक नहीं भर पाया है, सो... शायद मेरा मन इस भाव को यूं ही सजाये / बसाये रखेगा?
दीदी, आपका शाब्दिक आशीर्वाद शायद मेरे कुछ काम आये, शुक्रिया।

रविकुमार बाबुल
ग्वालियर


आदरणीय संगीता पुरी जी,
यथायोग्य अभिवादन् ।

शुक्रिया, आपने ईश्वर की गलती पोस्ट को ब्लॉग 4 वार्ता में स्थान दिया, लगा ईश्वर ने अपनी गलती स्वीकार ली, और आपके मार्फत हामी भर दी। ब्लॉग 4 वार्ता में शामिल करके।

रविकुमार बाबुल
ग्वालियर


आदरणीय रविकर जी,
यथायोग्य अभिवादन् ।

सुन्दर लगी ईश्वर की गलती, शुक्रिया।

रविकुमार बाबुल
ग्वालियर

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