4

इजाजत

Posted by babul on 6/27/2011 12:03:00 PM

मैंनें बरसते हुये पानी में,
दी थी इजाजत उसको?
चाहता है तो,
छोड़कर चला जाये मुझे,
मेरे आंखों की नमी,
जंजीर न बन जाये कहीं,
ुउसकी?
बस इतना- सा स्वार्थ,
उसकी चाह में ,
मेरा भी रहा था,
बारिश में इजाजत देने का?


  • रविकुमार सिंह



|

4 Comments


बहुत ही बढ़िया लिखा है !
मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)


बहुत अच्छा लगा.....रचना बहुत सार्थक और प्रभावशाली है.


आदरणीय संजय जी,
मेरी रचना सार्थक बन पड़ी है या आपके पढऩे से मेरा लिखना सार्थक हुआ है? यह तय करने में वक्त लगेगा। यकीन मानिये मेरा मानना है आपके पढऩे से मेरे शब्दों को सार्थकता मिली है। शुक्रिया।
रविकुमार बाबुल
-------------
http://babulgwalior.blogspot.com


Sachin Malhotra ji,
आपके विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया.
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार ....
रविकुमार बाबुल
-------------
http://babulgwalior.blogspot.com

Post a Comment

Copyright © 2009 babulgwalior All rights reserved. Theme by Laptop Geek. | Bloggerized by FalconHive.