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रिश्ता करीब निकला

Posted by babul on 5/17/2011 02:10:00 PM

रविकुमार बाबुल

तुझसे यह मेरा रिश्ता अजीब निकला।
तेरी यादों का लेकर सलीब निकला।

दिल चोटिल, पांव घायल, जख्म तमाम,
मेरे इश्क का, ऐसा नसीब निकला।

कुछ सुनता तो बात कहां बिगड़ती,
जो शख्स ही मेरा रकीब निकला।

कातकर तेरी यादों को ओढ़ा मैंनें
तमाम मौसम बचकर ये गरीब निकला।

दुनियां से दूरी बन गई मेरी,
और तुझसे ही रिश्ता करीब निकला।

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