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भीड़ में तन्हा

Posted by babul on 5/16/2011 01:05:00 PM

उर्मी जी पर्थ ऑस्ट्रेलिया द्वारा लिखे गये और उनके ब्लॉग पर शुक्रवार 26 अगस्त 2010 को पोस्ट किये गये चार लाइनें अक्षरस: साभार प्रस्तुत हैं।


आँसू को बहुत समझाया तन्हाई में आया करो,
लोगों के बीच आकर हमारा मज़ाक न उड़ाया करो,
ये सुनकर आँसू टपक कर बोले...
भीड़ में भी आपको तन्हा पाते हैं इसलिए चले आते हैं !

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