6

कोशिश नहीं की मैनें

Posted by babul on 2/27/2011 01:12:00 PM
तुमको कभी सच बतलाने की कोशिश नहीं की मैनें।
सच है यह, कुछ छिपाने की कोशिश नहीं की मैनें।।

चारों-सूं तुम्हारी खुशबू लिये उड़ता फिरा मैं लेकिन,
कभी गुलों को बहकाने की कोशिश नहीं की मैनें।

तेरा बिछडऩा बार-बार, दर्द देकर गया हर बार,
तुझको ये जख्म दिखलाने की कोशिश नहीं की मैनें।

दिल तो बहुत चाहता था सुर्ख गुलाब दे दूं तुझको,
खुद को हौसला दिलाने की कोशिश नहीं की मैनें।

तसव्वुर रहा मेरा, तुम बन जाओ मेरी अमृता लेकिन,
खुद को इमरोज बनाने की कोशिश नहीं की मैनें।

रविकुमार बाबुल

|

6 Comments


तेरा बिछडऩा बार-बार, दर्द देकर गया हर बार,
तुझको ये जख्म दिखलाने की कोशिश नहीं की मैनें।
sher accha laga , badhai


आदरणीय सुनीलकुमार जी,

यथायोग्य अभिवादन् ।

मेरी रचना पर आपके कमेन्ट पढऩे के बहाने आपकी दुनिया में जाने का अवसर मिला। यह ब्लॉग कम आईना ज्यादा महसूस हुआ, सब कुछ मेरी दुनिया सा ही लगा, अनजाने ही मेरी ही-सी दुनिया सजाये-बचाये रखने के लिये आपका शुक्रिया।

धन्यवाद।

रविकुमार बाबुल ,
फीचर-सम्पादक
बीपीएन टाइम्स
ग्वालियर

-----------------

मोबाइल नंबर : 09302650741


तसव्वुर रहा मेरा, तुम बन जाओ मेरी अमृता लेकिन,
खुद को इमरोज बनाने की कोशिश नहीं की मैनें।.....

बहुत ही खूबसूरत अलफ़ाज़.....शानदार लाजवाब गज़ल ।


तुमको कभी सच बतलाने की कोशिश नहीं की मैनें।
सच है यह, कुछ छिपाने की कोशिश नहीं की मैनें।।
aur
तसव्वुर रहा मेरा, तुम बन जाओ मेरी अमृता लेकिन,
खुद को इमरोज बनाने की कोशिश नहीं की मैनें।
...bahut achhi lagi ye panktiyan...
sundar gajal prastuti ke liye dhanyavaad


आदरणीय शरद जी,

यथायोग्य अभिवादन् ।

जी... आपने पढ़ा, अच्छा लगा, अपनी व्यस्तता में से समय चुराने के लिये शुक्रिया, यकीन मानिये आपकी प्रतिक्रिया कुछ और रचने-गढऩे में मेरी मदद करेगी, सो इस मदद के लिये धन्यवाद।

रविकुमार सिंह


आदरणीय कविता रावत जी,

यथायोग्य अभिवादन् ।

बेतरतीब अपने कुछ ख्यालों और ख्वाबों को कागज पर उकेरने का जो प्रयास मैनें किया, वह आपको पसंद आया, धन्यवाद। भविष्य में भी आपका संबल मिलेगा, विश्वास है ।

रविकुमार सिंह

Post a Comment

Copyright © 2009 babulgwalior All rights reserved. Theme by Laptop Geek. | Bloggerized by FalconHive.