0

तुम जियो हजारों साल, साल के दिन हों पचास हजार

Posted by babul on 1/23/2011 10:51:00 AM

रविकुमार बाबुल

महंगाई को लेकर पिछले 100 दिन में सरकार जिस तरह सक्रीय हुयी है, ऐसी सक्रियता अगर वह तब से ही दिखला देती, जब उंगली पर तिलक लगाने वालों के दरीचे पर यह सरकार पहुंची थी? इस वायदे के साथ कि हमारा हाथ-आम आदमी के साथ तो स्थिति कुछ और होती। तब से ही उसे इस डायन को लेकर झाड़-फूंक और बचाव के मंत्रों का उच्चारण शुरु कर देना चाहिये था? लेकिन तब तो केन्द्र में सत्ता का मद् पीये बैठी, यू पी ए की सरकार भी हमारे सामाजिक ढ़ाचे कह लें या फिर धार्मिक जो भी चाहें। सिख-हिन्दू के नाम पर लड़ते भी रहे और हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर दंगे झेलते भी रहे, लेकिन फिर भी हम, हमारी एकता जिन्दाबाद के नारे लगा कर अपने हिन्दुस्तानी होने पर गौरान्वित होते रहे हैं की तरह ही, महंगाई को लेकर केन्द्र में सरकार चला रही कांग्रेस शरद पवार पर निशाना साधती भी रही और महंगाई बढ़ाने की इजाजत भी गठबंधन का धर्म निभाते हुये जमा खोरों पर कार्यवाही नहीं करके दी जाती रही। जनाब फसलें बर्बाद होने से जितनी महंगाई नहीं बढ़ी, उससे कहीं अधिक तो कृषिमंत्री की जुबान ने बढ़ा दिया। चीनी मिल मालिकों के मुंह ही नहीं, उनकी जेब की भी मिठास बनी रहे, इसलिये जागो ग्राहक जागो का श्लोक बांचते हुये भी सरकार अवाम का मुंह कसैला करने से नहीं चूकी। प्राकृतिक-आपदा या मौसम का मिजाज नहीं, सरकार में बैठे लोगों ने ही प्याज की कीमतें बढऩे का रास्ता अख्तियार भी किया और लोगों को दो-दो आंसू रूलाते हुये उस पर चलने पर मजबूर भी।
जनाब ठीक है...... महंगाई है,.......सरकार भी चिन्तित है और सोनिया भी, देश के भीतर दो देश की बात करने वाले राहुल की साफगोई भी इस बीच इस वक्तव्य के रुप में देश के सामने आ चली है कि गठबंधन वजह है महंगाई की, जी... समझा जा सकता इस मर्म को, सोनिया के विदेशी मूल को तूल देकर अस्तित्व में आई एन.सी.पी. के पार्टी प्रवक्ता ने भी कभी महंगाई की नहीं, जब भी बात की तो गठबंधन के धर्म के बहाने इटली के गठबंधन की, कि जहां के रिश्ते को भुनाते हुये दलाली तो खायी-खिलायी जा सकती है, लेकिन देश की सत्तर फीसदी भारत की उसी आबादी के लिये इटली के गठबंधन से रोटी नहीं जुटाई जा सकती है?
वजह साफ है, सरकार को एक कमेटी रिपोर्ट देती है कि देश में सड़ रहे अनाज के इस दौर में पी.डी.एस. के तहत, आपकी भाषा में कहें तो राशन कार्ड धारकों को 35 किलो प्रतिमाह अनाज दिया जाना चाहिये? वहीं सरकार को दिशा दिखलाने वाली सरकार की ही ेक समिति चाहती है कि सभी को नहीं, सिर्फ गरीबी रेखा के नीचे अपना जीवन-बसर करने वाले लोगों को ही अनाज तो मिले लेकिन दो या तीन रूपये किलो यह अनाज मिले? हकीकत यह है कि ऐसे में इन सभी को जिनको कुछ मिलना चाहिये था, इस दौर में भी उन्हें सिर्फ भूख मिल रही है। क्या कहियेगा? या किससे कहियेगा?
जी... जनाब... लवासा, आदर्श, 2- जी स्पेक्ट्रम से गांठ बांधकर या कहले गठबंधन में बंधकर यह सरकार चल रही है, यानी भूख और भ्रष्टाचार के इस दौर में भी वह सेहतमंद है, शायद इसलिये ही वह यह मान बैठी है कि इस मुल्क की सत्तर फीसदी आबादी महंगाई के जहर से निजात की तलबगार इसलिये है कि वह अपने खाने (मसलन पेटैटो चिप्स, नूडल्स, बर्गर आदि रेडीमेड चटकारे) पर ज्यादा खर्च कर रही है, सो चूल्हें पर सिकती रोटी उसके लिये महंगी हो चली है? और आकड़े कहते है महंगाई 135 प्रतिशत बढ़ी जबकि आय में इजाफा 8 प्रतिशत से 15 प्रतिशत ही हुआ है देश की सत्तर फीसदी आबादी का फिर भी वह नूडल्स खा रही यह सरकार यह मान बैठी है?
बिड़ला ने भले ही अपनी मिल में कते सूत से उतनी लम्बी धोती ही तैयार की गयी जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उतना न ढ़क सके जो वह देश के नंगे लोगों का प्रतीक ही नहीं लग सकें। इधर आज अभिनेता, नेता बनने की ख्वाहिश में लोकतंत्र के मंदिर में पहुंचने की चाह रखने लगा है। ऐसे में किसको चार दशक पहले यह ख्याल आ गया था कि उसने सैल्यूलाइट पर गाने के माध्यम से भूखे को रोटी नहीं मिलती, नंगे को लंगोटी नहीं मिलती? जैसा बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था, बावजूद इसके कई सरकारें आयी और गई यह सवाल आज भी जस का तस खड़ा हुआ है, अनुत्तरित?
हां....इसी के बीच आपने जश्न मनाने की ख्वाहिश पाल रखी है, तो आपको लखनऊ आना पड़ेगा? मौका जश्न का है, 15 तारीख यानी आज उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती 55 वर्ष की हो चली है, पूरा लखनऊ सज गया है। निलाम्बरी हो चला यह शहर केक खाने-खिलाने की कुब्बत रखता है, लेकिन रोटी वह भी सूखी रोटी की बात तो जश्न के बीच नहीं कीजियेगा, यह केन्द्र का दायित्व है, महंगाई वह ही कम कर सकती है? ऐसे में बी.एस.पी. के विधायक जेल में जश्न मनायेंगे अपनी नेता का, कुछ और रसूखदारों पर भी कार्यवाही लम्बीत है, जश्न वह भी मनायेंगे अपने-अपने तरीके।
मायावती दीर्घायुु हों, विपक्ष ही नहीं, खासकर राहुल की नजर से माननीय कांशीराम की पुण्य आत्मा उन्हें बचाये रखे, भूख और भ्रष्टाचार के बीच यह कामना करके बहिन जी का जन्म दिन तो मनाया ही जा सकता है? सो छोडिय़े भूख और भ्रष्टाचार की चिन्ता, जन्मदिन का जश्न मनाईये। ध्यान रखियेगा भूल से भी भूख और भ्रष्टाचार के सामने मत कह बैठियेगा तुम जियो हजारों साल साल के दिन हों पचास हजार।

|

0 Comments

Post a Comment

Copyright © 2009 babulgwalior All rights reserved. Theme by Laptop Geek. | Bloggerized by FalconHive.