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Posted by babul on 8/23/2010 12:19:00 PM
यह सच है मुख्य मंत्री जी, खतरे में है आपकी कुर्सी
- रवि कुमार बाबुल
बैल मुझे मार की कहावत लगता है इन दिनों मध्यप्रदेश केञ् मुチयमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर अक्षरशः ब्रह्माास्त्र की तरह सटीक निशाने पर बैठ रही है? ऐसा अगर न होता तो साध्वी की वापसी को लेकर मचे बवंडर केञ् बीच, उन्हें कुर्ञ्सी से हटाने और कुञ्छ नेताओं को दिल्ली में अर्थ दिये जाने का अर्थ समझ मुチयमंत्री की पेशानी पर आये बल इसकी किसी बालमन वाले की तरह सहज ही चुगली नहीं करते?संघ केञ् गलियारे में गिल्ली-डंडा खेलने से लेकर साा केञ् शीर्ष तक पहुंच स्टミपिंग करने में माहिर हो चले शिवराज सिंह ने भले ही अनूप मिश्रा को बेहतर स्टミपिंग कर मंत्री पद से आउट करार करवा दिया हो? वह यह भलीभांति जानते हैं कि वास्तव में इन दिनों उनकी कुर्ञ्सी पर बन आयी है?अरे जनाब, साध्वी उमा की पार्टी में वापसी को लेकर पार्टी दिग्गजों पर बढ़ता दबाव तथा गुजरे जमाने केञ् हमराह की भी साासुख भोगने केञ् बावजूद साध्वी उमा की वापसी की सार्वजनिक सहमति। यही कुञ्छ ऐसी वजहें हैं कि मुチयमंत्री शिवराज सिंह को अपनी कुर्ञ्सी केञ् लिये खतरा महसूस हो चला है?हो भी タयूं न, एक मुチयमंत्री की जान तो कुर्ञ्सी में ही बसती है और जिस तरह केञ् निर्णय, भले ही संघ की गाइड-लाइन केञ् अनुसार ही पार्टी केञ् शीर्ष नेतृत्व ने बीते महीनों में लिये हैं वह तो यही कहते हैं कि संघ से बड़ी न तो साा है और न ही संगठन। ऐसे में हमारे मुチयमंत्री जिनकेञ् परिजन डミपर घोटाले की जांच झेल रहे हैं। वहीं शाइनिंग इंडिया केञ् सहारे साा सुख भोगने का स्वप्न देखने वाली पार्टी अटलबिहारी बाजपेयी केञ् सहारे आडवाणी को प्रधानमंत्री केञ् पद पर काबिज तो नहीं करवा सकी, लेकिन उन्हीं अटल बिहारी बाजपेयी केञ् रिश्तेदार, अयोध्या रूञ्पी ग्वालियर केञ् दशरथ रूञ्पी अनूप मिश्रा केञ् राम जैसे पुत्र ने मुट्ठी भर जमीन केञ् लिये भारतीय जनता पार्टी केञ् जंगलराज में जो हिंसक उत्पात मचाया, वह तो इतिहास बनकर पुलिस केञ् रोजनामचा में दर्ज हो गया? बेला गांव से उठे चीख-चीत्कार केञ् बाद अनूप मिश्रा मंत्री पद त्याग, विधायकी केञ् दम पर ही अपने परिजनों को इंसाफ दिलवाने की जद्दोजहद इन दिनों कर रहे हैं। खैर सियासत की अपनी अलहदा आबरूञ् होती है, उसकेञ् वचन किसी को क्ब् वर्षों केञ् लिये वनवास नहीं दिलवा सकते हैं, タयोंकि यहां वचन मांगने वाले सियासतदान और तथास्तु कहने वाले मतदाताओं केञ् उम्र की सीमा महज भ् वर्षों से बड़ी होती ही नहीं है। ...सो साा केञ् सागर में भ्रष्टाचार की कुर्ञ्सी पर बैठ, नौका विहार कर आनंदित भारतीय जनता पार्टी केञ् तमाम आरोपी मंत्रियों में से कुञ्छ हिचकोले खाते दिखलायी देते रहें तो आप खुद को शर्मसार मत कीजियेगा। タयोंकि ऊपर से लेकर रसातल तक यह चल पड़ा नया राजनीतिक शगल या यूं कहें चलन है। रही बात अनूप मिश्रा की तो उनका गुनाह आज केञ् राजनीतिक दौर में एक लड़केञ् का बाप होना कतई नहीं माना जा सकता है, या सपाट शホदों में कहें कि यह गुनाह नहीं है। बल्कि मंत्री पद की कुर्ञ्सी तो उन्होंने साध्वी उमा केञ् करीब होने केञ् अपराध की वजह से बतौर सजा गंवाई है। प्रदेश केञ् मुチयमंत्री शिवराज सिंह केञ् बयान केञ् मंतव्यानुसार जब प्रदेश केञ् मुチयमंत्री की कुर्ञ्सी पर से भ्रष्टाचार केञ् चलते कोई भू-माफिया उन्हें उतार कर किसी दूसरे को बैठाने की हिミमत और जुर्रत कर सकता है तो शिवराज सिंह से पूछा जाना चाहिये कि ऐसे में प्रदेश केञ् तमाम आईएएस और आईपीएस सहित तमाम महत्वपूर्ण पदों पर बैठे नौकरशाहों को बैठाने और उतारने केञ् खेल केञ् पीछे किसी ऐसे ही तंत्र का हाथ या यूं कहें जाल तो नहीं बिछा है? इसे समझना ही नहीं, समय रहते खोजना भी होगा? मुチयमंत्री जी आप निश्ंिचत रहें, लोकतंत्र केञ् वजूद तक आपकी कुर्ञ्सी किसी भू-माफिया या किसी डॉन केञ् दम पर तो नहीं खिसकेञ्गी। वजह कभी बनी भी तो वही होगी, जिसकी चर्चा आप दिल्ली में भी पार्टी आलाकमान से कर आये हैं। पिछले दिनों इस संबंध में आये आपकेञ् बयान केञ् बाद उन लोगों से タया कहा जाये जो गाहे-बगाहे यह पूछ बैठते हैं कि जिस माफिया केञ् दम पर वह साा में पहुंचे वही माफिया उन्हें कुर्ञ्सी से タयूं उतारना चाहेंगे,चौहान साहब, आपकी कुर्ञ्सी साध्वी उमा की वापसी और तिस पर बदले राजनीतिक समीकरण केञ् चलते चली जाये तो कहा नहीं जा सकता है। अनूप मिश्रा और उनकेञ् समर्थित विधायक सहित सुमित्रा दीदी और इस्तीड्डेञ् की हद केञ् मुहाने तक जा चुकेञ् कबीने केञ् मंत्री बाबूलाल गौर का प्रदेश में कोई राजनीतिक वजूद है तो यह तय मान लिया जाये कि इतिहास खुद को एक बार फिर दोहरायेगा ? और साध्वी उमा की वापसी और प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की मांग की सुगबुगाहट का कहीं न कहीं कनेタशन अवश्य है, ऐसे में शिवराज सिंह चौहान आपकी कुर्ञ्सी खतरे में है, यह भी सोलह आने सच है।

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